“ककसाड़” आखिर है क्या,,,

ककसाड़ का अर्थ:”-ककसाड़ “( जत्रा या पूजा यात्रा) शब्द व्यापक अर्थ में जनजातियों के द्वारा की जाने वाली लोक देवी और लोक देवताओं की आराधना है जो नृत्य प्रधान पर्व के रूप में मनाया जाता है । बस्तर में एक निश्चित परिधि में निवास करने वाले अबूझमाड़ इलाके का यह एक गोत्र पर्व है जहां गोंड जनजाति के युवक- युवती ,अबाल- वृद्ध सभी एक नियत गांव में जुटते हैं और पूजा अर्चना करते हैं। इसमें युवक-युवतियों की प्रमुख भूमिका होती है।गायता,सिरसा,  गुनिया एवं गांव के पुजारी इस पूजा को संपन्न कराते हैं। मांदर, ढोल, नगाड़ा, तुड़मुड़ी, मोहरी आदि लोक वाद्य यंत्रों की संगत में नृत्य की प्रस्तुति प्रारंभ होती है। ककसाड़ पर्व मनाने की कोई खास तिथि निश्चित नहीं रहती अलग-अलग गांव का ककसाड़ अलग-अलग समय में मनाया जाता है । ककसाड़ पर्व के साथ ही आदिवासी कबीलों में शादी विवाह की विधिवत शुरुआत होती है।

ककसाड़ 2021

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